Prabhat Pandey's Posts

कविता : समय का पहिया

मानो तो मोती ,अनमोल है समय नहीं तो मिट्टी के मोल है समय कभी पाषाण सी कठोरता सा है समय कभी एकान्त नीरसता सा है समय समय किसी को नहीं छोड़ता किसी के आंसुओं से नहीं पिघलता समय का पहिया चलता है चरैवेति क्रम कहता है स्वर्ण महल में रहने वाले तेरा मरघट से नाता है सारे ठौर ठिकाने तजकर मानव इसी ठिकाने आता है || भूले से ऐसा ना करना अपनी नजर में गिर जाए पड़ना ये जग सारा बंदी खाना जीव यहाँ आता जाता है विषय ,विला... »

कविता : सम्मान तिरंगा (२६ जनवरी विशेष )

यह तिरंगा तो ,हमारी आन बान है यह दुनिया में रखता ,अजब शान है यह राष्ट्र का ईमान है ,गर्व और सम्मान है स्वतन्त्रता और अस्मिता की ,यह एक पहचान है क्रान्तिकारियों की गर्जन हुंकार है विभिन्नता में एकता की मिसाल है एकता सम्प्रभुता का कराता ज्ञान है धर्म है निरपेक्ष इसका ,जाति एक समान है यह तिरंगा तो ,हमारी आन बान है यह दुनिया में रखता ,अजब शान है || भेदभाव की तोड़ दीवारें यह सबको गले लगाता है राष्ट्र पर... »

कविता : हौसला

हौसला निशीथ में व्योम का विस्तार है हौसला विहान में बाल रवि का भास है नाउम्मीदी में है हौसला खिलती हुई एक कली हौसला ही है कुसमय में सुसमय की इकफली हौसला ही है श्रृंगार जीवन का हौसला ही भगवान है हौसले की ताकत इस दुनियां में सचमुच बड़ी महान है || हौसले की नाव में बैठ जो आगे बढ़ा मुश्किलों के पर्वतों पर वो चढ़ा हौसला नव योजनाओं का निर्माण है हौसला विधा का महाप्राण है हौसले से ही उतरा धरती पर आकाश है हौस... »

कविता : इन्सान नहीं मिल पाया है

हर मन्दिर को पूजा हमने भगवान नहीँ मिल पाया है इस भूल भुलैया सी दुनिया में इन्सान नहीं मिल पाया है || हर व्यक्ति स्वार्थ में डूब रहा मन डूब गया भौतिकता में संवेदनाओं का क़त्ल हुआ झूंठ दगाबाजी करने में कौन यहाँ पर ज़िन्दा है मुझे समझ न आया है इन तथा कथित इन्सानों में इन्सान नहीं मिल पाया है हर मन्दिर को पूजा हमने भगवान नहीँ मिल पाया है इस भूल भुलैया सी दुनिया में इन्सान नहीं मिल पाया है || रहकर साथ अल... »

आओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं…

सुखद हो जीवन हम सबका क्लेश पीड़ा दूर हो जाए स्वप्न हों साकार सभी के हर्ष से भरपूर हो जाएं मिलन के सुरों से बजे बांसुरी ये धरती हरी भरी हो जाए हों प्रेम से रंजीत सभी ऐसा कुछ करके दिखलायें आओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं || हम उठें व उठावें जगत को सृजन का सुर ताल हो हम सजग हों सुखद हो जीवन हमारा उच्च उन्नत भाल हों अब न कोई अलगाव हो बस जोड़ने की बात हो बढ़ न पावे असत हिंसा शान्त सुरभित प्राण हों सतत प्रयास और... »

कविता : मोहब्बत

नदी की बहती धारा है मोहब्बत सुदूर आकाश का ,एक सितारा है मोहब्बत सागर की गहराई सी है मोहब्बत निर्जन वनों की तन्हाई सी है मोहब्बत ख्वाहिशों की महफिलों का ,ठहरा पल है मोहब्बत शाख पर अरमानों के गुल है मोहब्बत ख्वाहिशों के दरमियां ,एक सवाल है मोहब्बत दर्द का किश्तों में ,आदाब है मोहब्बत लबों से दिल का पैगाम है मोहब्बत शब्द कलम की साज है मोहब्बत भटकी चाह मृग तृष्णा सी है मोहब्बत भावों की मधुर आवाज है मो... »

कविता : यह कैसा धुआँ है

लरजती लौ चरागों की यही संदेश देती है अर्पण चाहत बन जाये तो मन अभिलाषी होता है बदलते चेहरे की फितरत से क्यों हैरान है कैमरा जग में कोई नहीं ऐसा जो न गुमराह होता है भरोसा उगता ढलता है हर एक की सांसो से तन मरता है एक बार आज ,जमीर सौ सौ बार मरता है || उसी को मारना ,फिर कल उसे खुदा कहना न जाने किसके इशारे से ये वक्त चलता है नदी ,झीलेँ ,समुन्दर ,खून इन्सानों ने पी डाले बचा औरों की नज़रों से वो अपराध करता... »

कविता : जिस प्यार पे हमको बड़ा नाज था …

जिस प्यार पे हमको बड़ा नाज था क्या पता था वो अन्दर से कमजोर है जिन वादों पे हमको बड़ा नाज था क्या पता था कि डोर उसकी कमजोर है || करूँ किसकी याद ,जो तसल्ली मिले रात के बाद आती रही भोर है जिक्रे गम क्यों करें ,कोई कम तो नहीं थोड़े नैना भी उसके चितचोर हैं इतना दूर न जाओ कि मिल न सके प्यार की उमंगें ,हवा में बिना डोर है वो छिंडकते हैं नमक ,मेरे हर ज़ख्म पर क्या पता था कि सोंच ,कैद उनकी दीवारों में है जिस ... »

कविता : इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं है

मौत के बाद क्या है किसी ने जाना नहीं है प्रकृति को क्यों किसी ने पहचाना नहीं है आखिर मृत्यु के रहस्य को ईश्वर ने क्यों छिपाया इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं है || क्यों नहीं बन पाया वो दूसरा चांद तारा क्यों नहीं बना दूजा ,सूर्य सा सितारा बरमूडा ट्राएंगल का ,रहस्य क्यों न सुलझा कैलाश पर्वत पर क्यों कोई चढ़ पाया नहीं है इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं है || क्यों नहीं बनी दूजी नदियां क्य... »

कविता : वंदे मातरम का ,फिर से अलख जगाना होगा

इधर चुनावों की हलचल है और कुर्सियों की टक्कर उधर बुझ रहे माँ के दीपक ,जलते जलते सरहद पर क्या होगा ऐसी कुर्सी का जनता की मातमपुर्सी का सत्ता के इन भूंखे प्यासों को अब तो कुछ समझाना होगा वंदे मातरम का ,फिर से अलख जगाना होगा || कितना कष्ट सहा घाटी ने कितना खून बहा माटी में कितनी मिटी मांग की लाली कितनी गोद हो गयी खाली हिमगिरि के हर कण कण को ज्वालामुखी बनाना होगा वंदे मातरम का ,फिर से अलख जगाना होगा |... »

कविता : वो सारे जज्बात बंट गए

गिरी इमारत कौन मर गया टूट गया पुल जाने कौन तर गया हक़ मार कर किसी का ये बताओ कौन बन गया जिहादी विचारों से ईश्वर कैसे खुश हो गया धर्म परिवर्तन करने से ये बताओ किसे क्या मिल गया जाति ,धर्म समाज बंट गये आकाओं में राज बट गये आज लड़े कल गले मिलेंगे वो सारे जज्बात बंट गए || नफरतों की आग में यूँ बस्तियां रख दी गईं मुफ़लिसों के रूबरू मजबूरियां रख दी गईं जीवन से मृत्यु तक का सफर ,कुछ भी न था बस हमारे दिलों मे... »

सूखे दरख्त रोते हैं क्यों

जहाँ सबसे पहले सूरज निकले वहाँ खौफ का मरघट क्यों जहाँ काबा -काशी एक धरा पर उस माटी में दलदल क्यों खून के आंसू रो रहे हैं क्रांतिवीर बलिदानी क्यों नेताओं की लोलुपता पर सबको है हैरानी क्यों नंगे सभी हमाम में दिखे सबकी एक कहानी क्यों || गाँधी और सुभाष के सपने जलते उबल रहे हैं क्यों महंगाई बढ़ रही निरन्तर बनी दुधारू गइया जनता क्यों फर्क हम में और सूरज में कहाँ है हमारी सहम सी विकल किरणें क्यों देश में ... »

कविता : ये दिल बहार दुनियां कितनी बदल रही है

मानवता बिलख रही है दानवता विहँस रही है है आह आवाजों में अस्मिता सिसक रही है ये दिल बहार दुनियां कितनी बदल रही है || ये शाम रंगीली ,सुबह नशीली उनकी हो रही है जहाँ निशा निरन्तर ,नृत्य नशा में भय से क्रन्दन कर रही है बीच आंगन में मजहबी दीवार खिंच रही है नग्नता सौन्दर्य का ,अर्थ हो रही है ये दिल बहार दुनियां कितनी बदल रही है || अँधेरी निशा है ,दिशा रो रही है नदी वासना की अगम बह रही है सब कुछ उलट पलट ह... »

सफलता ,ऊँची उड़ान

कविता : सफलता ,ऊँची उड़ान जीवन है छणिक तुम्हारा भूल कभी कोई न जाना बनकर सूरज इस वसुधा का जर्रे जर्रे को चमकानां || सूरज ,चांद सितारे छुपते हम ,तुमने भी है एक दिन जाना नाम रहे जो जग में रोशन ऐसा कुछ करके दिखलाना बनकर गुल इस वसुधा का जर्रे जर्रे को दमकाना || जैसा चाहते हो औरों से वैसा ही करके दिखलाना गर प्रकाश में चाहो रहना प्रकाश बन कर जग में है छाना बनकर खुशियां इस वसुधा की जर्रे जर्रे को हर्षाना |... »

कविता : भाई दूज

भाई दूज का पर्व है आया सजी हुई थाली हाथों में अधरों पर मुस्कान है लाया भाई दूज का पर्व है आया || अपने संग कुछ स्वप्न सुहाने लेकर अपने आंचल में खुशियां भरकर कितना पावन दिन यह आया बचपन के वो लड़ाई झगड़े बीती यादों का दौर ये लाया भाई दूज का पर्व है आया || कुछ वादों को याद दिलाने किसी की सुनने अपनी सुनाने प्रेम सौहार्द का तिलक लगाने रिश्तों की सौगात है लाया भाई दूज का पर्व है आया || ‘प्रभात ‘... »

कविता :दीपों का त्यौहार

दीपों की जगमग है दिवाली दीपों का श्रृंगार दिवाली है माटी के दीप दिवाली मन में खुशियाँ लाती दिवाली || रंगोली के रंग दिवाली लक्ष्मी संग गणपति का आगमन दिवाली स्नेह समर्पण प्यार भरी मिठास का विस्तार दिवाली अपनों के संग अपनों के रंग में घुल जाने की प्रीति दिवाली हाथी घोड़े मिट्टी के बर्तन फुलझड़ियों का खेल दिवाली || जब कृष्ण ने बजाई थी बांसुरी होली के रंग छलके थे राम राज्य के आगमन से झिलमिल तारे चमके थे ... »

देश में कुछ ऐसा बदलाव होना चाहिए

जीवन में बुलन्दियों को छूना है अगर कुछ कर दिखाने का दिल में,जुनून होना चाहिए दामन को रखिए दूर ,दलदलों से पाप की शालीनता और स्वच्छता को ,जीवन में होना चाहिए || अधिकार गर समान सभी के लिये नहीं अब ऐसी व्यवस्था में,बदलाव होना चाहिए पीढ़ी है दिग्भ्रमित ,यहाँ निर्णय हैं खोखले अब शिक्षा व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए || अज्ञान वश ही आज तक ,हम आपस में लड़े हैं अब शिक्षित ,सुयोग्य समाज होना चाहिए है जज्बा और ... »

ऐ चाँद ,तुम जल्दी आ जाना

आज ,अखण्ड सौभाग्यवती का माँ उमा से है वर पाना ऐ चाँद, तुम जल्दी आ जाना || आज पिया के लिये है सजना संवरना अमर रहे सदा मेरा सजना ऐसा वर तुम देते जाना ऐ चाँद ,तुम जल्दी आ जाना || अहसानों के बोझ तले मुझे मत दबाना आज आरजू है यही इबादत में मोहब्बत का विस्तार कराना रहे सदा साथ सजना का ऐसा वर तुम देते जाना ऐ चाँद ,तुम जल्दी आ जाना || पिया ही तो है मेरा गहना उसके लिए है ,आज गजरे को पहना मेरे गजरे को , है च... »

जीवन परिभाषा

धर्म ईमान -इन्साफ को मानकर आदमी बनकर तुम जगमगाते रहो त्याग से ही मनुज बन सका देवता देवता बन सबों में समाते रहो || न घबराओ तुम संघर्षों से कभी तूफानों में भी उगता तारा है चलते चलते थक मत जाना कहीं विश्वास जगत का एक सहारा है पथ की बाधा न होगी कहीं सिर्फ आशा का दीप तुम जलाते रहो || शान्ति मिलती नहीं मन को कभी काया जब तक ,इच्छाओं की दासी है फैलती दीप्ति व्यक्तित्व की ,ढोंग आडम्बरों से नहीं ईश्वर अन्तर... »

कविता : दर्द

जब याद तुम्हारी आती है दिल यादों में खो जाता है आँखों में उमड़ते हैं बादल जी मेरा घुट घुट जाता है || प्यार की सूनी गलियों में हर वक्त भटकता रहता हूँ जिन राहों में साथ थे हम उनको ही तकता रहता हूँ सारा मन्जर अब बदल गया धुंआ धुंआ सा दिखता है अब तो रातों का रहजन भी दिन में रहबर लगता है || कब तक मैं खामोश रहूँ किससे अपना दर्द कहूँ प्यार के वादों की डोली को कब तक लेकर साथ चलूँ अपना कोई बदल गया हर शख्स बे... »

कविता : जीवन की सच्चाई ,एक कटु सत्य

दुनियां में किसकी मौत और किसकी जिन्दगी है जिन्दगी ही मौत और मौत जिन्दगी जीवन मिला तो तय है ,मरना भी पड़ेगा हम सबको एक राह ,गुजरना ही पड़ेगा || जीवन तो खाना -वदोश है संभव इसका नहीं होश है झांक ले उस पार भी नहीं कोई रोक टोक है अच्छाई और बुराई का भी उस पार द्वन्द है नेकी और सच्चाई अगले जन्म का मापदण्ड है निश्चय ही यह पंचमहल कल खाली करना पड़ेगा हम सबको एक राह ,गुजरना ही पड़ेगा || अमीर हो या गरीब हो या हो ... »

कविता : पतित पावनी गंगा मैया

देवी देवता करते हैं गंगा का गुणगान इसके घाटों पर बसे हैं ,सारे पावन धाम गंगा गरिमा देश की ,शिव जी का वरदान गोमुख से रत्नाकर तक ,है गंगा का विस्तार भागीरथी भी इन्हे ,कहता है संसार सदियों से करती आई लोगों का उद्धार शस्य श्यामल गंगा के जल से ,हुआ है ये संसार जन्म से लेकर मृत्यु तक ,करती है सब पर उपकार लेकिन बदले में मानव ने ,कैसा किया व्यवहार || आज देवी का प्रतीक प्लास्टिक प्रदूषण के जाल में फंस गई ब... »

कविता : भ्रष्टाचार बेलगाम हो रहा है

आज कथनी का कर्म से कोई मेल नहीं है कहने को बातें ऊँची करने को कुछ नहीं है गीता रामायण की धरती पर हिंसा का संगीत चढ़ा है कैसे बचेगी मानवता दानवता का दल बहुत बड़ा है अब प्रेम का पथ शूल पथ हो रहा है अब सत्य का रथ ध्वस्त हो रहा है अब बांसुरी का स्वर लजीला हो रहा है अब काग का स्वर ही सुरीला हो रहा है नयी सभ्यता आचरण खो रही है बिष बीज अपने ही घर बो रही है मंहगाई दावानल सी दिन ब दिन बढ़ रही है फिक्र है किसे... »

दशहरा विशेष

दशहरा का पर्व है आया अच्छाई ने बुराई को हराया विजय गीत सब मिल गाओ कुछ ऐसा पर्व मनाओ || सोंचो तरक्की के जुनून में हम खुद से हो गए पराए हमको लगे जकड़ने ,ख्वाहिशों के मकड़ी साए तज कुरीतियां अन्तस्तल में प्रेम दीप जलाओ कुछ ऐसा पर्व मनाओ || लूटपाट और छीना झपटी तोड़ फोड़ को छोड़ो विघटनकारी घृणित भावना से अपना मन मोड़ो अब नैतिक पथ पर चलो चलाओ कुछ ऐसा पर्व मनाओ || रक्त विषैला दौड़ रहा है नर की नस नस में कर्म घिन... »

आखिर क्यों

क्यों सपनों के विम्ब ,अचानक धुंधले पड़ते जा रहे पीड़ा के पर्वत जीवन राहों पर अड़ते जा रहे क्यों कदमों को नहीं सूझ रही ,राह लक्ष्य पाने की क्यों अस्मिता भीड़ के अन्दर खोती जा रही क्यों आंसू का खारा जल दृग का आंचल धो रहा क्यों अतृप्त भावों से मन व्याकुल हो रहा क्यों लोग वेदना देकर मानस को तड़पा रहे क्यों दुःख की सरिता में प्राण डूबते जा रहे क्यों अब ईमान सरे बाजार बिक रहा क्यों तल्खियों के बीच इन्सान पिस... »

कविता : माँ दुर्गा

क्यों न होगा दूर तम ,माँ को याद करके देखिये भावनाओं के भवन से भय भगाकर देखिये ज़िंदगी खुशियों से भरी नज़र आयेगी जागती ज़िन्दादिली से ,माँ को हृदय में बसाकर तो देखिये || माँ की भक्ति से जिंदगी जाफरानी लगे पूस की धूप जैसी सुहानी लगे माँ की कृपा है दवा ज़िन्दगी के लिये आशीष अपरिमित माँ का ,पाकर तो देखिये || जीवन में जब दुःख सताने लगे चहुँ ओर अंधेरा नजर आने लगे उम्मीदों के दिये जब बुझने लगें बर्बाद ख्वाबो... »

कविता : वो एकतरफा प्यार

वो एकतरफा प्यार ,जिसके लिये हुआ दिल बेक़रार मैं ढूंढता रहा उसे ,होकर बेक़रार उसका मुस्कुराना देखकर आँखों का झुकना देखकर उसके आगे लगने लगे महखाने सारे बेअसर वो जाते जिधर जिधर मैं पहुंचता उधर उधर जैसे मृग कस्तूरी के लिए ,भटके इधर उधर अब तो दिन कटता था ,रस्ता उनका देखकर उनसे मिलने का मौका ढूंढता था ,दिल तो जानभूझकर ।। वो कॉलेज कैन्टीन में मिलना ,न कोई इत्तेफाक था वो क्यूँ न समझ पाए ,ये इत्तेफाक ही मेरा... »

कविता :मोहनदास करमचन्द गांधी

दुनियां में हैं शख्स लाख ,पर दिल के पास हैं गाँधी अहिंसा ,सत्य ,समता शांति की तलवार हैं गाँधी अटल ,अविजेय ,अविचल ,वज्र की दीवार हैं गाँधी अडिग विश्वास ,जीवन का उमड़ता ज्वार हैं गाँधी उमड़ता कोटि प्राणों का ,पुलकमय प्यार हैं गाँधी मनुजता के अमर आदर्श की झंकार हैं गाँधी सूर्य सम कांतिमयी दीप्तिमान हैं गाँधी | | खादी के द्वारा स्वावलंबन का ,सपना गाँधी ने देखा था स्वदेशी का उनका विचार सबसे अनोखा था गीता... »

कविता :पति -पत्नी का रिश्ता और कड़वाहटें

पति पत्नी का सम्बन्ध,मनभाव का एक आनन्द होता है यह पुष्पित सुमन का मकरंद होता है यह है पावन प्रणय की उद्भावना यह कविता का एक अनछुआ छन्द होता है यह अन्धेरे में राह दिखाता है जीवन में रोशनी भर देता है रेगिस्तान को जन्नत बनाता है अंगारों को ठंडक पहुंचाता है ये रिश्ता बड़ा ही नाजुक होता है इसे अटूट बनाना दोनोँ के हाँथ में होता है इस रिश्ते में मीठा अहसास होता है दूर होकर भी हर मोड़ पर ,आपस का साथ होता है... »

कविता : आईपीएल २०२०

लो आ गया चौके छक्कों का सफर ये सुहाना आईपीएल का हुआ हर कोई दीवाना गूंजा रण ताली से सारा जमाना आईपीएल का हुआ हर कोई दीवाना बुमराह की यार्कर ,रसेल का सिक्सर आर्चर की बाउन्सर ,डी विलियर्स का स्कूपर संजू सैमसन का गेंदबाजों को डराना आईपीएल का हुआ हर कोई दीवाना चहल की गुगली ,है अबूझ पहेली रबाडा का बाउन्सर ,जाता है सिर के ऊपर केएल राहुल का इनसाइड आउट शॉट लगाना आईपीएल का हुआ हर कोई दीवाना कोहली का हुक पुल... »

कविता :आओ जियें जिन्दगी ,बन्दगी के लिए

पता नहीं किस बात पर इतराता है आदमी कब समझेगा अर्थ ढाई आखर का आदमी भूल बैठा है आज वो निज कर्तव्य को खून क्यों मानव का बहाता है आदमी क्यों शब्दों के बाण से औरों का दिल दुखाता है आदमी “जियो और जीने दो “कब समझेगा ये आदमी खुद से क्या भगवान से है बेखबर आज आस्था के मंदिर गिराता है आदमी एक दूजे से बाबस्ता है हर आदमी सोंचकर कल की मरता है आज आदमी आज धर्म के हिस्सों मैं बंटा है आदमी जाति वर्ण की ... »

तड़प

मेरे जो अपने थे ,न जाने आज वो किधर गये जो सपने संजोये थे ,वो सारे टूटकर बिखर गये खुशियां मेरे आंगन की ,न जाने कहाँ बरष गयीं और एक हम जो बूँद बूँद को तरस गये अब तो सुनाई दे रहीं हैं नफरती रुबाइयाँ न जाने कहाँ प्यार के नगमात खो गये आंशुओं का अबकी बार ऐसा चला सिलसिला कि क़त्ल सब दिलों के जज्बात हो गये याद में उसके सारे पल गुजर गए जैसे प्रेम फाग के सुहाने रंग उतर गए याद में उसकी कुछ चित्र उभर कर आ गए ज... »

बेरोजगारी

सरकारें बदलती हैं यहाँ पर नवयुवकों को आश्वासन देती हैं झूठे भाषण देती हैं पर नौकरियां नहीं देती हैं हर जगह लम्बी हैं कतारें व्यवस्था में हैं खामियां बड़बड़ाते हुये घिसट जाती हैं ,देखो कितनी जिन्दगानियाँ आत्मनिर्भरता का स्वप्न दिखाती झूठी दिलासाएँ देती है सब कुछ है कागजों पर पर नौकरियां नहीं देती हैं बेरोजगारी का आलम है ऐसा ,लोग कितना तड़प रहे कल तो बस लिखते थे निबंध इस पर आज खुद ही इस दौर से गुजर रहे... »

सच्ची मोहब्बत ही, ताजमहल बनवाती है

कविता : सच्ची मोहब्बत ही, ताजमहल बनवाती है जो खो गया है मेरी जिंदगी में आकर उस पर गजल लिखने के दिन आ गए हैं दिल दिमाग का हुआ है बुरा हाल अब तो रात भर जागने के दिन आ गए हैं प्यार की लहरें जब से दिल में उठ गई सजने संवरने के दिन आ गए हैं मोहब्बत ने वो एहसास जगाया है दिल में अब तो तकदीर पलटने के दिन आ गए हैं सच्ची मोहब्बत वो मझधार है संग इसके तैरने के दिन आ गए हैं वो ही करना पड़ा जो चाहा न दिल ने कभी इ... »

घर जलाना औरों का आसान है

अगर जग बदलता है बदलने दीजिए वक्त के साथ ही चलना सीखिए आसमानों को छूने की हसरत है अगर दिल में कोई ख्वाब पालना सीखिए जीवन जीने का आनन्द है तभी दर्द औरों का उठाकर देखिये खुद ब खुद जीना तुम्हे आ जायेगा निज पसीने को बहाकर देखिये मुश्किलों का अपना मजा है दोस्तों मुश्किलों को जीत कर देखिये रहोगे भीड़ में लोगों की कब तक कभी खुद की पहचान बना कर देखिये घर जलाना औरों का आसान है किसी का घर बसाकर देखिये हर ह्रद... »

यह कैसा अच्छा दिन आया है

इन्सानियत को हमने रुलाया है आज डर ने मुकाम दिल में बनाया है मंदिर से अधिक मधुशालाएं हैं ऐसा बदलाव अपने देश में आया है ये वस्त्रहीन सभ्यता अपने देश की नहीं पर्दा ही आज ,लाज पर से उठाया है बेकारी ,भूंख प्यास ने सबको रुलाया है भारत में यह कैसा अच्छा दिन आया है साहित्य से क्यों दूर हैं आज की पीढ़ियां इस विषय पर क्यों शोध नहीं है कैसा ये सभ्य समाज बन रहा है आधुनिक संगीत अश्लीलता परोस रहा है आज सियासत क्... »

गुरु महिमा

गुरु अर्चना ,गुरु प्रार्थना ,गुरु जीवन का आलंबन है गुरु की महिमा ,गुरु की वाणी जैसे परमात्मा का वंदन है प्रेम का आधार गुरु है ,ज्ञान का विस्तार गुरु है भविष्य का निर्माण वही है ,कर्म का आकाश वही है मैं तो हूँ एक कोरा कागज़ ,मेरा अंतरज्ञान वही है वो उद्धारक ,वो विस्तारक, वक्क की आवाज वही है ज्ञान रूपी गागर भर दे ,सच्चा द्रोणाचार्य वही है अर्जुन और एकलव्य सा जीवन देखे सब में सच्चे गुरु का ज्ञान वही ह... »

माँ

प्रेम के सागर में अमृत रूपी गागर है माँ मेरे सपनों की सच्ची सौदागर है भूल कर अपनी सारी खुशियां हमको मुस्कुराहट भरा समंदर दे जाती है अगर ईश्वर कहीं है ,उसे देखा कहाँ किसने माँ धरा पर तो तू ही ,ईश्वर का रूप है हमारी आँखों के अंशु ,अपनी आँखों में समा लेती है अपने ओंठों की हंसी हम पर लुटा देती है हमारी ख़ुशी में खुश हो जाती है दुःख में हमारे आंसू बहाती है हम निभाएं न निभाएं अपना फ़र्ज़ निभाती है ऐसे ही न... »

क्योंकि आज रविवार है

थोड़ी देर और मस्ती करने दो क्योंकि आज रविवार है सपनों की दुनिया में खोने दो क्योंकि आज रविवार है जिंदगी बहुत हैं शिकवे तुमसे चल रहने दे छोड़ सब क्योंकि आज रविवार है मुझे मालूम है ये ख्वाब झूठे और ख्वाहिशें अधूरी हैं मगर जिंदा रहने के लिए कुछ चिंतन जरुरी है आज ख़ुशी व चिंतन का वार है क्योंकि आज रविवार है समझो तो कोई पराया नहीं खुद न रूठो ,सबको हंसा दो यही जीवन का सार है क्योंकि आज रविवार है हफ्ते भर ब... »

बेटे के जन्मदिन पर कविता

एक छोटा सा सपना पूरा हुआ जब मेरा बेटा आर्यन आया तोतली सी बोली से जब तुमने मुझे पापा बुलाया दिल के सारे दर्द दूर हुए जब नन्हा चेहरा मुस्कुराया तू मेरा लाडला राजकुमार मेरा ही दर्पण कहलाया नटखट भोली सी शैतानी तेरी ,सबके मन को भाए दादा दादी देख देखकर मंद मंद मुस्काए मम्मी तेरी नजर उतारे वारी वारी जाये बुआ फूफा चाची ताई तू सबके मन को भाये है आज तुम्हारा जन्मदिवस 27 अगस्त है आया कृतार्थ हुआ प्रभु का जो ... »

ॐ साई राम

बाबा जी मैं जपूं तेरा नाम सांई नाम की अलख जगा ले भोली सी सूरत अपने मन में बिठा ले सच्चा प्यारे सांई नाम बाबा जी जपूं मैं तेरा नाम कृपा दृष्टि की तेरी माया मन कोमल मृदु शीतल काया तेरी महिमा कोई जान न पाया मुखमंडल पर आभा की छाया प्यार का जो अमृत बरसाया सुमिरन कर लो सांई नाम बाबा जी मैं जपूं तेरा नाम मन में अपने भाव जगा लो जिस चाहे उस रूप में पा लो मिट जाता मन का अंधियारा मन को मिलता शांत किनारा भटके... »

गणपति बप्पा मोरिया

बुद्धि विनायक पार्वतीनंदन ,मंगलकारी हे गजबंदन वक्रकुंड तुम महाकाय तुम ,करता हूँ तेरा अभिनंदन कंचन -कंचन काया तेरी ,मुखमंडल पर तेज समाया है मूषक वाहन करो सवारी ,मोदक तुमको प्यारा है भक्ति भाव में तेरी देखो,खोया ये जग सारा है मोहनी मूरत सुन्दर सूरत भोले बाबा के तुम प्यारे हो गौरी माता के लाल तुम्ही तुम ही आँखों के तारे हो विघ्न हरण तुम विघ्न को हर लो खुशियों से झोली को भर दो धन यश वैभव के भंडार भरो ... »

अंजान सफर

चला जा रहा हूँ अंजान से एक सफर में साथ न कोई साथी किसी मंजिल का एक साये के पीछे न जाने किसकी तलाश में एक चेहरा ढूंढता हूँ न जाने किसकी आस में कभी कोई मिलता है तो ये सोंचता हूँ कि ये वही तो नहीं जिसका ये साया है इस अंजान से चेहरे ने ,न जाने किसका चेहरा पाया है क्यूँ नहीं समझ पाता ,मैं उसकी बातें इसी शरारत में निकल गयीं ,न जाने कितनी रातें हंसता हूँ कभी कभी अपनी इसी नासमझी पर पल हैं ये बड़े मजेदार अप... »

बचपन के दिन…..

वो भी क्या उमर थी,जब मस्ती अपने संग थी , सारी फिकर और जिम्मेदारियाँ, किसी ताले मे बंद थी, वो गलियाँ जिसमे खेलते थे क्रिकेट,पतंग उड़ाते कभी थे, कभी तोड़ते थे कांच तो कभी पेंच लड़ाते वो हम थे, क्या सच में वो दिन थे बचपन के ? बारिश मे भीगना ,क्लासेस बँक करना , कीचड़ के पानी मे खुद को भिगोना, छत पे खड़े होके सीटी बजाना, मोहल्ले मे अपनी शानो -शौकत दिखाना , क्या सच में वो दिन थे बचपन के ? दोस्तों के साथ सारे... »

खुशहाली

अपने पन की बगिया है ,खुशहाली का द्वार जीवन भर की पूंजी है ,एक सुखी परिवार खुशहाली वह दीप है यारों ,हर कोई जलाना चाहता है खुशहाली वह रंग है यार्रों ,हर कोई रमना चाहता है खुशहाली वह दौर था यारों ,कागज़ की नावें होती थीं मिट्टी के घरौंदे थे ,छप्पर की दुकानें होती थी कहीं सुनाई देती थी रामायण ,कहीं रोज अजानें होती थी खुशहाली को नजर लग गयी ,अब मद सब पर छाया है खुशहाली कहीं दब गई ,इंसानों ने इसे हराया है... »

अजनबी

आज किसी ने सोये हुये ख्वाबों को जगा दिया भूली हुई थी राहें भटके हुये मुसाफिर को मिला दिया जिंदगी का फलसफा जो कहीं रह गया था अधूरा मुरझाई हुई तकदीर को जीने के काबिल बना दिया देना चाहता था मुझे बहुत कुछ मगर उसे क्या पता था उसकी चाहत की उसी आग ने मेरा दामन जला दिया बस राख के कुछ ढेर बाकी थे वक्त की तेज़ आंधी ने उनको उड़ा दिया खाली पड़े उन मकानों में परछाईयाँ ही तो बस बाकी हैं वरना हालत के इस दौर ने सब क... »

महेंद्र सिंह धोनी प्राउड ऑफ़ इंडियन क्रिकेट टीम

जब जब गरजा धोनी का बल्ला विश्व पताका लहराई 1983 के बाद ,2011 में ट्रॉफी आई स्टम्पिंग और बैटिंग देखकर जिसकी दुनिया स्तब्ध हो जाती थी शान्त रहकर कैसे देते हैं मात धोनी ने ही सिखायी थी फौलादी था जिगर जिसका न झुकने वाला हौसला था दुनिया ने माना था लोहा जब हेलीकॉप्टर शॉट निकला था २८ साल का ख्वाब जब कोई पूरा न कर पाया था अपने सिक्सर से जीत दिलाकर धोनी ने ही जश्न मनवाया था कभी धोनी की उड़ती जुल्फों का मुशर... »

गांव की ज़िन्दगी ,अब पहले जैसी नहीं….

गांव की ज़िन्दगी ,अब पहले जैसी नहीं जहाँ रिश्ते तो हैं ,वह मिठास नहीं जहाँ मिट्टी तो है ,पर खुशबू नहीं जहाँ तालाब तो है ,पर पानी नहीं जहाँ आम बौराते तो हैं ,पर सुगन्ध का महकना नहीं गांव की ज़िन्दगी ,अब पहले जैसी नहीं यहाँ लोग बेगाने से हो गये लोग सुख साधन के भूंखे हो गये गांव अब शहरों में तब्दील हो गये गांव अब चकाचौंध से लबरेज हो गये बुजर्गों के आशिर्वाद में जो स्नेह कीर्ति का भाव था पाश्चात्य संस्क... »

हमने वक्त को अच्छे से आजमाया है

वक्त ने किससे क्या क्या न करवाया है कभी रोते को हंसाया है तो कभी हँसते को रुलाया है कभी ख़ुशी से दामन भर देता है तो कभी ग़मों को तकदीर में शामिल कर देता है गम और ख़ुशी पर तो वक्त की चिलमन पड़ी है जब जिसके चिलमन को गिराया है तो वक्त सामने आया है वक्त ने किसी का इंतजार कब किया हर आदमी वक्त के हांथों मजबूर हुआ वक्त ने किससे क्या क्या न करवाया है कभी रोते को हंसाया है तो कभी हँसते को रुलाया है कई बार वक्त... »

15 अगस्त , स्वतंत्रता का पर्व

बहुत देखी गमगीन गुलामी आजादी के वीरों ने कतरा कतरा बहा दिया भारत माता के चरणों में भारत देश हमारा सोने की चिड़िया कहलाता था देश का परचम खुले गगन में लहर -लहर लहराता था आजादी का अखण्ड दीप तब नित नवनित होकर जलता था सतयुग ,त्रेता ,द्धापर युग का संस्कार तब मन में बसता था राम कृष्ण के पद चिन्हों पर हर मानव अपनी रचना रचता था आया कलियुग कुटिल नीति का दुश्मन ने पासा खेला भारत माता के चरणों को अपनी गद्दारी ... »

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