कविता : देखो ,नया वर्ष आया है आ रहा व्योम से मदभरा प्यार बह रही हर गली में सुधा धार कौमुदी का बिखरता मदिर गान हर किरन के अधर पर सरस तान प्रगति का नया […]
कविता : देखो ,नया वर्ष आया है आ रहा व्योम से मदभरा प्यार बह रही हर गली में सुधा धार कौमुदी का बिखरता मदिर गान हर किरन के अधर पर सरस तान प्रगति का नया […]
क्या करीने से महफ़िल सजी आपकी फिर क्यों रहमत नहीं है अजी आपकी आँखों का है धोखा या धोखा मिट रहा खो गया है चैन ,सुकून मिलता नहीं हुस्नवालों में होती है ,चाहत नहीं फिर […]
माँ के जीवन की सब साँसे बच्चों के ही हित होती हैं चोट लगे जब बालक के तन को आँखें तो माँ की रोती हैं ख़ुशी में हमारी ,वो खुश हो जाती है दुःख में […]
सिक्सर कौन लगायेगा कौन नाम बनायेगा किसके सिर पर सजेगा ताज यह अब तय हो जायेगा सही गिरेगी गुगली या स्विच हिट लग जायेगा बाउंसर गुजरेगी कानों से या हुक शॉट खेला जायेगा क्या गेंद […]
वही पालकी देश की जनता वही कहार है लोकतन्त्र के नाम पर बदले सिर्फ सवार हैं राज है सिर्फ अंधेरों का उजालों को वनवास है यहाँ तो गांधी के सपनों का उड़ता नित्य उपहास है […]
मानो तो मोती ,अनमोल है समय नहीं तो मिट्टी के मोल है समय कभी पाषाण सी कठोरता सा है समय कभी एकान्त नीरसता सा है समय समय किसी को नहीं छोड़ता किसी के आंसुओं से […]
यह तिरंगा तो ,हमारी आन बान है यह दुनिया में रखता ,अजब शान है यह राष्ट्र का ईमान है ,गर्व और सम्मान है स्वतन्त्रता और अस्मिता की ,यह एक पहचान है क्रान्तिकारियों की गर्जन हुंकार […]
हौसला निशीथ में व्योम का विस्तार है हौसला विहान में बाल रवि का भास है नाउम्मीदी में है हौसला खिलती हुई एक कली हौसला ही है कुसमय में सुसमय की इकफली हौसला ही है श्रृंगार […]
हर मन्दिर को पूजा हमने भगवान नहीँ मिल पाया है इस भूल भुलैया सी दुनिया में इन्सान नहीं मिल पाया है || हर व्यक्ति स्वार्थ में डूब रहा मन डूब गया भौतिकता में संवेदनाओं का […]
सुखद हो जीवन हम सबका क्लेश पीड़ा दूर हो जाए स्वप्न हों साकार सभी के हर्ष से भरपूर हो जाएं मिलन के सुरों से बजे बांसुरी ये धरती हरी भरी हो जाए हों प्रेम से […]
नदी की बहती धारा है मोहब्बत सुदूर आकाश का ,एक सितारा है मोहब्बत सागर की गहराई सी है मोहब्बत निर्जन वनों की तन्हाई सी है मोहब्बत ख्वाहिशों की महफिलों का ,ठहरा पल है मोहब्बत शाख […]
लरजती लौ चरागों की यही संदेश देती है अर्पण चाहत बन जाये तो मन अभिलाषी होता है बदलते चेहरे की फितरत से क्यों हैरान है कैमरा जग में कोई नहीं ऐसा जो न गुमराह होता […]
जिस प्यार पे हमको बड़ा नाज था क्या पता था वो अन्दर से कमजोर है जिन वादों पे हमको बड़ा नाज था क्या पता था कि डोर उसकी कमजोर है || करूँ किसकी याद ,जो […]
मौत के बाद क्या है किसी ने जाना नहीं है प्रकृति को क्यों किसी ने पहचाना नहीं है आखिर मृत्यु के रहस्य को ईश्वर ने क्यों छिपाया इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं […]
इधर चुनावों की हलचल है और कुर्सियों की टक्कर उधर बुझ रहे माँ के दीपक ,जलते जलते सरहद पर क्या होगा ऐसी कुर्सी का जनता की मातमपुर्सी का सत्ता के इन भूंखे प्यासों को अब […]
गिरी इमारत कौन मर गया टूट गया पुल जाने कौन तर गया हक़ मार कर किसी का ये बताओ कौन बन गया जिहादी विचारों से ईश्वर कैसे खुश हो गया धर्म परिवर्तन करने से ये […]
जहाँ सबसे पहले सूरज निकले वहाँ खौफ का मरघट क्यों जहाँ काबा -काशी एक धरा पर उस माटी में दलदल क्यों खून के आंसू रो रहे हैं क्रांतिवीर बलिदानी क्यों नेताओं की लोलुपता पर सबको […]
मानवता बिलख रही है दानवता विहँस रही है है आह आवाजों में अस्मिता सिसक रही है ये दिल बहार दुनियां कितनी बदल रही है || ये शाम रंगीली ,सुबह नशीली उनकी हो रही है जहाँ […]
कविता : सफलता ,ऊँची उड़ान जीवन है छणिक तुम्हारा भूल कभी कोई न जाना बनकर सूरज इस वसुधा का जर्रे जर्रे को चमकानां || सूरज ,चांद सितारे छुपते हम ,तुमने भी है एक दिन जाना […]
भाई दूज का पर्व है आया सजी हुई थाली हाथों में अधरों पर मुस्कान है लाया भाई दूज का पर्व है आया || अपने संग कुछ स्वप्न सुहाने लेकर अपने आंचल में खुशियां भरकर कितना […]
दीपों की जगमग है दिवाली दीपों का श्रृंगार दिवाली है माटी के दीप दिवाली मन में खुशियाँ लाती दिवाली || रंगोली के रंग दिवाली लक्ष्मी संग गणपति का आगमन दिवाली स्नेह समर्पण प्यार भरी मिठास […]
जीवन में बुलन्दियों को छूना है अगर कुछ कर दिखाने का दिल में,जुनून होना चाहिए दामन को रखिए दूर ,दलदलों से पाप की शालीनता और स्वच्छता को ,जीवन में होना चाहिए || अधिकार गर समान […]
आज ,अखण्ड सौभाग्यवती का माँ उमा से है वर पाना ऐ चाँद, तुम जल्दी आ जाना || आज पिया के लिये है सजना संवरना अमर रहे सदा मेरा सजना ऐसा वर तुम देते जाना ऐ […]
धर्म ईमान -इन्साफ को मानकर आदमी बनकर तुम जगमगाते रहो त्याग से ही मनुज बन सका देवता देवता बन सबों में समाते रहो || न घबराओ तुम संघर्षों से कभी तूफानों में भी उगता तारा […]
जब याद तुम्हारी आती है दिल यादों में खो जाता है आँखों में उमड़ते हैं बादल जी मेरा घुट घुट जाता है || प्यार की सूनी गलियों में हर वक्त भटकता रहता हूँ जिन राहों […]
दुनियां में किसकी मौत और किसकी जिन्दगी है जिन्दगी ही मौत और मौत जिन्दगी जीवन मिला तो तय है ,मरना भी पड़ेगा हम सबको एक राह ,गुजरना ही पड़ेगा || जीवन तो खाना -वदोश है […]
देवी देवता करते हैं गंगा का गुणगान इसके घाटों पर बसे हैं ,सारे पावन धाम गंगा गरिमा देश की ,शिव जी का वरदान गोमुख से रत्नाकर तक ,है गंगा का विस्तार भागीरथी भी इन्हे ,कहता […]
आज कथनी का कर्म से कोई मेल नहीं है कहने को बातें ऊँची करने को कुछ नहीं है गीता रामायण की धरती पर हिंसा का संगीत चढ़ा है कैसे बचेगी मानवता दानवता का दल बहुत […]
दशहरा का पर्व है आया अच्छाई ने बुराई को हराया विजय गीत सब मिल गाओ कुछ ऐसा पर्व मनाओ || सोंचो तरक्की के जुनून में हम खुद से हो गए पराए हमको लगे जकड़ने ,ख्वाहिशों […]
क्यों सपनों के विम्ब ,अचानक धुंधले पड़ते जा रहे पीड़ा के पर्वत जीवन राहों पर अड़ते जा रहे क्यों कदमों को नहीं सूझ रही ,राह लक्ष्य पाने की क्यों अस्मिता भीड़ के अन्दर खोती जा […]
क्यों न होगा दूर तम ,माँ को याद करके देखिये भावनाओं के भवन से भय भगाकर देखिये ज़िंदगी खुशियों से भरी नज़र आयेगी जागती ज़िन्दादिली से ,माँ को हृदय में बसाकर तो देखिये || माँ […]
वो एकतरफा प्यार ,जिसके लिये हुआ दिल बेक़रार मैं ढूंढता रहा उसे ,होकर बेक़रार उसका मुस्कुराना देखकर आँखों का झुकना देखकर उसके आगे लगने लगे महखाने सारे बेअसर वो जाते जिधर जिधर मैं पहुंचता उधर […]
दुनियां में हैं शख्स लाख ,पर दिल के पास हैं गाँधी अहिंसा ,सत्य ,समता शांति की तलवार हैं गाँधी अटल ,अविजेय ,अविचल ,वज्र की दीवार हैं गाँधी अडिग विश्वास ,जीवन का उमड़ता ज्वार हैं गाँधी […]
पति पत्नी का सम्बन्ध,मनभाव का एक आनन्द होता है यह पुष्पित सुमन का मकरंद होता है यह है पावन प्रणय की उद्भावना यह कविता का एक अनछुआ छन्द होता है यह अन्धेरे में राह दिखाता […]
लो आ गया चौके छक्कों का सफर ये सुहाना आईपीएल का हुआ हर कोई दीवाना गूंजा रण ताली से सारा जमाना आईपीएल का हुआ हर कोई दीवाना बुमराह की यार्कर ,रसेल का सिक्सर आर्चर की […]
पता नहीं किस बात पर इतराता है आदमी कब समझेगा अर्थ ढाई आखर का आदमी भूल बैठा है आज वो निज कर्तव्य को खून क्यों मानव का बहाता है आदमी क्यों शब्दों के बाण से […]
मेरे जो अपने थे ,न जाने आज वो किधर गये जो सपने संजोये थे ,वो सारे टूटकर बिखर गये खुशियां मेरे आंगन की ,न जाने कहाँ बरष गयीं और एक हम जो बूँद बूँद को […]
सरकारें बदलती हैं यहाँ पर नवयुवकों को आश्वासन देती हैं झूठे भाषण देती हैं पर नौकरियां नहीं देती हैं हर जगह लम्बी हैं कतारें व्यवस्था में हैं खामियां बड़बड़ाते हुये घिसट जाती हैं ,देखो कितनी […]
कविता : सच्ची मोहब्बत ही, ताजमहल बनवाती है जो खो गया है मेरी जिंदगी में आकर उस पर गजल लिखने के दिन आ गए हैं दिल दिमाग का हुआ है बुरा हाल अब तो रात […]
अगर जग बदलता है बदलने दीजिए वक्त के साथ ही चलना सीखिए आसमानों को छूने की हसरत है अगर दिल में कोई ख्वाब पालना सीखिए जीवन जीने का आनन्द है तभी दर्द औरों का उठाकर […]
इन्सानियत को हमने रुलाया है आज डर ने मुकाम दिल में बनाया है मंदिर से अधिक मधुशालाएं हैं ऐसा बदलाव अपने देश में आया है ये वस्त्रहीन सभ्यता अपने देश की नहीं पर्दा ही आज […]
गुरु अर्चना ,गुरु प्रार्थना ,गुरु जीवन का आलंबन है गुरु की महिमा ,गुरु की वाणी जैसे परमात्मा का वंदन है प्रेम का आधार गुरु है ,ज्ञान का विस्तार गुरु है भविष्य का निर्माण वही है […]
प्रेम के सागर में अमृत रूपी गागर है माँ मेरे सपनों की सच्ची सौदागर है भूल कर अपनी सारी खुशियां हमको मुस्कुराहट भरा समंदर दे जाती है अगर ईश्वर कहीं है ,उसे देखा कहाँ किसने […]
थोड़ी देर और मस्ती करने दो क्योंकि आज रविवार है सपनों की दुनिया में खोने दो क्योंकि आज रविवार है जिंदगी बहुत हैं शिकवे तुमसे चल रहने दे छोड़ सब क्योंकि आज रविवार है मुझे […]
एक छोटा सा सपना पूरा हुआ जब मेरा बेटा आर्यन आया तोतली सी बोली से जब तुमने मुझे पापा बुलाया दिल के सारे दर्द दूर हुए जब नन्हा चेहरा मुस्कुराया तू मेरा लाडला राजकुमार मेरा […]
बाबा जी मैं जपूं तेरा नाम सांई नाम की अलख जगा ले भोली सी सूरत अपने मन में बिठा ले सच्चा प्यारे सांई नाम बाबा जी जपूं मैं तेरा नाम कृपा दृष्टि की तेरी माया […]
बुद्धि विनायक पार्वतीनंदन ,मंगलकारी हे गजबंदन वक्रकुंड तुम महाकाय तुम ,करता हूँ तेरा अभिनंदन कंचन -कंचन काया तेरी ,मुखमंडल पर तेज समाया है मूषक वाहन करो सवारी ,मोदक तुमको प्यारा है भक्ति भाव में तेरी […]
चला जा रहा हूँ अंजान से एक सफर में साथ न कोई साथी किसी मंजिल का एक साये के पीछे न जाने किसकी तलाश में एक चेहरा ढूंढता हूँ न जाने किसकी आस में कभी […]
वो भी क्या उमर थी,जब मस्ती अपने संग थी , सारी फिकर और जिम्मेदारियाँ, किसी ताले मे बंद थी, वो गलियाँ जिसमे खेलते थे क्रिकेट,पतंग उड़ाते कभी थे, कभी तोड़ते थे कांच तो कभी पेंच […]
अपने पन की बगिया है ,खुशहाली का द्वार जीवन भर की पूंजी है ,एक सुखी परिवार खुशहाली वह दीप है यारों ,हर कोई जलाना चाहता है खुशहाली वह रंग है यार्रों ,हर कोई रमना चाहता […]
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