कविता तेरे साथ खड़ी

चिंता त्याग प्रसन्नचित रह
कविता तेरे साथ खड़ी,
पूरी साथ न भी दे पाए
तो भी ताकत बनी खड़ी।

Comments

13 responses to “कविता तेरे साथ खड़ी”

  1. यह आप किसके लिए कह रहे हैं भाई?
    भावार्थ समझाइये।

  2. Satish Pandey

    कवि जिसे चाह कर भी अपना नहीं बना सके और दूसरा चाह कर भी कवि का न हो सके तो चिंतित संवेदना खुद पर ही हावी होकर जितना साथ निभा सके कविता से ही साथ देने की प्रतिबद्धता है।

    1. जी, थैंक्स

  3. साथ ही बेरोजगारी, निराशा से घिरे आम जन को चिंता न करने और कविता के माध्यम से उसकी आवाज उठाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई है।

    1. सही कहा आपने

  4. Geeta kumari

    बहुत सुंदर भाव

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  5. बहुत खूब

  6. Kumar Piyush

    Sundar

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