कविता: मनमर्जियाँ
चाहती हूँ एक कविता लिखना
मगर नाकाम हो जाती हूँ
विषय चुनने के लिए
छटपटाती हूँ
शब्द कुछ ऐसे हों
भावनायें मेरी व्यक्त करें
और कह दें
वह जो मैं कह नहीं पाती हूँ
निरर्थक है लेखन
जब तक भाव ना सिमटें
कविता में,
पल्लवित ना हों इरादे
प्रस्फुटित ना हों आकांक्षाएं और
ना चल पायें
मेरी मनमर्जियां….
बहुत खूब, उम्दा पंक्तियाँ
Thanks
रचनाकार की छटपटाहट का रचना के माध्यम से सटीक अभिव्यक्ति
शुक्रिया
बहुत खूब
धन्यवाद
छटपटाहट…
ऐसे शब्दोंवाली कवितायें रागात्मकता एवं कवि की विचार प्रगढ़ता को प्रदर्शित करती हैं
बहुत उत्तम
धन्यवाद