कविता लिखने की कला

आओ बच्चों तुम्हें सिखाए
कविता लिखने की कला।
कुछ शब्दों को ध्यान में रखो
मिल जायेगी काव्य कला।।
कल खल गल घल -घल घल ।
चल छल जल झल -झल झल।।
डल ढल डल टल -टल टल ।
तल दल नल थल -थल थल।।
पल फल बल मलमल मल।
रल शल हल कलकल कल।।
यही सार्थक शब्द हैं प्यारे।
रल मिल बना कवित्व रे प्यारे।

Comments

5 responses to “कविता लिखने की कला”

  1. Satish Pandey

    शास्त्री जी आपने अत्यंत सुंदर रचना के माध्यम से लिखने की ओर प्रेरित किया है। परिवेश से पूरी तरह परिचित कवि लेखनी कलम उठाने का आह्वान करती हुई दिखाई दे रही है। भाषा पठनीय और प्रवाहमय है। अति सुन्दर

    1. धन्यवाद पाण्डेयजी

  2. Geeta kumari

    बच्चों को कविता लिखने का आसान तरीका समझाती हुई और कविता लिखने की प्रेरणा देती हुई बहुत सुन्दर रचना ।अपना हुनर, जैसे अगली पीढ़ी को सौंपती हुई लाजवाब रचना

    1. शुक्रिया बहिन

  3. Ram Chander

    Good learning a make poetry

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