तुझ में पाया था प्रेम बहुत ,
सार्थक लगता था जीवन कुछ,
आंखों में प्रेम की बारिश थी,
कुछ कही- अनकही गुजारिश थी ।
मन भीग गया तन भीग गया,
ऐसी वो सुहानी बारिश थी।
निमिषा सिंघल
कविता
Comments
9 responses to “कविता”
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Nice
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Thanks
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Wah
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Thanks
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Thanks
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Nice
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Thanks
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वाह जी वाह
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Good
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