वो जिंदगी बेमानी, जिसमें कोई रवानी ना हो।
किस काम की जवानी, जिसकी कहानी ना हो।
मैंने भी मोहब्बत किया है, हाँ बेहद किया है,
किसी से दिल्लगी नहीं की, जो निभानी ना हो।
हमारा भी जमाना था, मशहूर इश्के-फसाना था,
इश्क ऐसा कीजिए, फिर जिसे छिपानी ना हो।
कहने को नहीं कहता, जिया जो वही लिखता हूँ,
सच कहता ‘देव’, वो नहीं कहता जो सुनानी ना हो।
देवेश साखरे ‘देव’
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