कहीं पे दिल तो कहीं पे निशाना

हम इतने भी नादान नहीं थे, जितना की वो मुझे समझते थे।
कस्मे वादे मुझ से करते थे, इश्क़ जनाब कहीं और फरमाते थे।।

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4 responses to “कहीं पे दिल तो कहीं पे निशाना”

  1. सुन्दर, अतिसुन्दर

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