कांटे बिछाते क्यों हो?

जब तुम्हारे और मेरे रास्ते अलग हैं तो
मेरे रास्तों में आकर कांटे क्यों बिछाते हो?
कोई मोहब्बत नहीं है हमसे अगर
तो एहसान जताते क्यों हो?

Comments

11 responses to “कांटे बिछाते क्यों हो?”

  1. वाह क्या है

  2. This comment is currently unavailable

  3. Pratima chaudhary

    सुन्दर अभिव्यक्ति

Leave a Reply

New Report

Close