कागज़ का टुकड़ा

कितनी बार लिखता और फिर फेक देता कागज़ का टुकड़ा तुझे लिखते समय
खुदा भी लिख कर मेरे लिए तुझे, फेख दिया होगा टुकड़ा कही

Comments

12 responses to “कागज़ का टुकड़ा”

  1. उत्तम भाव

  2. सुन्दर भाव

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सुन्दर पंक्तियां

  4. हृदय स्पर्शी रचना

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