कान्हा की मीरा

सघन बादल तुम….. मै धरती,
प्रेम सुधा पीने को तरसी।
उन्मुक्त प्रेम का हनन ना कर,
हे घन! अब बरस,
दुर्दशा ना कर।
प्रेम आचमन करा दे मुझको,
सुधा में नहला दे मुझको,
प्रेम पाश में बंधी है मै,
सीढ़ी दर सी चढ़ी हूं में।
आकाश में चांद को छूना है,
कान्हा की मीरा बनना है।
निमिषा सिंघल

Comments

8 responses to “कान्हा की मीरा”

    1. NIMISHA SINGHAL Avatar

      🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

  1. Priya Choudhary

    वाह क्या बात है

  2. MD Faiz Avatar

    Good
    Welcome
    Friends
    Call,9971928114

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