कारगिल विजय दिवस

शतशत नमन उन वीरों को,कारगिल विजय दिलवाई थी
स्वदेश की रक्षा की खातिर प्राणों की भेंट चढाई थी।।
साठ दिनों तक जो चली पाकभारत की लङाई थी
कितनों ने जान की बाजी हंस के यूँ लगाई थी
527 जवानो ने वीरता से जान अपनी गवायी थीं
यह वही कारगिल युद्ध है भाई
परवेज मुशर्रफ ने की जिसकी अगुआई थी।शत—-
हाँ वही परवेज जिसकी खूरफाती का नतीजा
औपरेशन भद्र से लाल था हिमालय का टीला
लालच फितरत है जिनकी,फिक्र क्यू करे वो किसीकी
हिम्मत कहाँथी बुजदिलो को सामनेकी लङाई करते जो
कश्मीर लद्दाख की कङी को कैसे सामने से तोङते वो
सियाचिन से सैनिकों को हटाने की खातिर
घुसपैठियो ने सेंध ऑपरेशन भद्र से लगायी थी।शत—
नवाज शरीफ अटल की दोस्ती की आङ में
भारत फंसता गया परवेज नीति के जाल मे
होश जब आया हमें ऑपरेशन विजय की शुरुआत की
तीस हजार सैनिकों के बल पर पाक को मात दी
जहाँ वेदप्रकाश मलिक के जैसे हो रणबांकुरे
मुशरफ जैसे घुसपैठिये खायेंगे,दर-दर की ठोकरे
अपनी करनी की सज़ा अपनी ही जमी पे पाई है
राजद्रोही बन गये हैं,सजा -ए-मौत की सुनवाई है।शत –
जान की परवाह न कर,चल पङे सेनानी जो
हाथ में लेकर तिरंगा,टाइगर हिल पे लहराने वो
नतमस्तक है भारत का जन-गण-मन
थी जिनमें अदम्य साहस, धैर्य व समर्पण
ऋणि हैं हम उन माँ,बहन,पत्नी बेटियों के
चिराग से अपने देश की लौ जलाई है ।शत—

Comments

5 responses to “कारगिल विजय दिवस”

  1. Geeta kumari

    बेहतरीन रचना

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    सुन्दर भाव

  3. Satish Pandey

    हिन्द की बहादुर सेना द्वारा कारगिल में दिखाई गयी वीरता का ओजस्वी चित्रण है वाह

  4. शत-शत के बीच में-का प्रयोग होगा वीर रस से परिपूर्ण ओजस्वी रचना

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