कितना अच्छा होता

कितना अच्छा होता
हर हिंदू मुस्लिम बन जाता
हर मुस्लिम हिंदू बन जाता
हर घर में अल्लाह आ जाते
हर घर में आ जाते राम
कितना अच्छा होता
हर गरीब अमीर बन जाता
हर अमीर बन जाता सज्जन
हर आंखों में सपने सजने
हर आंगन में खिलते फूल
कितना अच्छा होता
ना कहीं भी दंगा होता
ना किसी से पंगा होता
हर कोई होता अपना भाई
हर तरफ बजती शहनाई
कितना अच्छा होता
हर हिंदू मुस्लिम बन जाता
हर मुस्लिम हिंदू बन जाता
हर घर में अल्लाह आ जाते
हर घर में आ जाते राम
कितना अच्छा होता।
वीरेंद्र सेन प्रयागराज

Comments

10 responses to “कितना अच्छा होता”

  1. Satish Pandey

    सेन जी आपकी कविता में व्याप्त समरसता की भावना अतुलनीय है। बहुत खूब।

    1. Virendra sen Avatar

      समीक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

  2. Geeta kumari

    “हर घर में अल्लाह आ जाते हर घर में आ जाते राम”
    सुंदर भावनाओं को व्यक्त करती हुई बहुत सुंदर कविता

    1. Virendra sen Avatar

      बहुत-बहुत धन्यवाद् गीता जी

  3. बहुत ही सुंदर भाव

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