तुम्हें उठाने मे बेशक, हम सौ बार गिरे। तुमने भी तो गिर – गिर के उठने की जिद की। आज मंजिल की पनाह मे तेरा नाम मुस्कुराया है। कल हम रहें न रहें, मेरा दिया […]

नए साल ने दस्तक दी है आओ इसको हग कर लें । मन तन वचन ध्यान से अपना सारा जग कर ले। बीत गया सो बीत गया कुछ सीख गए कुछ सिखा गया । कल […]

अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करने आए हैं हम नौजवान देख रहा नतमस्तक होकर अपनी  दिलेरी आसमान भारत के लाडलें हम मातृभूमि पर प्राण चढ़ाएं तन मन धन से हम सब जग जननी का मान बढ़ाएं कण-कण […]

प्यार के धागों से रिश्तो को सिल रहा हूं बड़ा हूं फिर भी झुक कर मिल रहा हूं सुना है प्यार में ताकत बहुत होती है हर बिगड़े काम आसान बना देती है उम्मीद है, […]

चाहोगे जीतना तभी जीत पाओगे मानोगे अपने हैं तभी अपनाओगे लोभ और ईर्ष्या के दलदल से जब तक निकलने की सोच ना होगी मन के रावण को तुम कैसे जला पाओगे। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

माटी की मूरत होते हैं बच्चे जैसा बनाओगे वैसे बन जाएंगे चाहो तो उनको गांधी बना दो जो सत्य की राह का पथिक बनेगा चाहो तो उसको भगत सिंह बुलाओ वो देश की खातिर मर […]

यह जो नाजुक सा दौर है आहिस्ता आहिस्ता खत्म हो जाएगा बस उम्मीदों का दीपक तुम यूं ही आगे भी जलाए रखना। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

भोग विलास के लिबास पहनकर कब तक खुद से प्यार करोगे काम क्रोध ईर्ष्या को त्यागो जीवन का भव पार करोगे माया मोह के इम्तहान में जब तक सफल ना होगे तुम लोगों के दिल […]

लम्हों ने खता की है सजा हमको मिल रही है ये मौसम की बेरुखी है खिजां हमको मिल रही है सोचा था लौटकर फिर ना आएंगे तेरे दर पर बैठे हैं तेरी महफिल में खुद […]

पर्यावरण के असंतुलन की तस्वीर हर ओर दिखने लगी है जिंदगी जीने की एक नई परिभाषा चहुं ओर लिखने लगी है विकट गर्मी का परिणाम दिख रहा है सूख रहे तालाब पेड़ कट कट बिक […]

कितना अच्छा होता हर हिंदू मुस्लिम बन जाता हर मुस्लिम हिंदू बन जाता हर घर में अल्लाह आ जाते हर घर में आ जाते राम कितना अच्छा होता हर गरीब अमीर बन जाता हर अमीर […]

निकलूं कब बाहर मैं घर से हरदम बैठा रहता मौसम के डर से एक साल में बारह महीने चार महीने गिरे पसीने फिर सोचूं मैं निकलूं बनके तब होती बरसात जमके आठ महीने यूं ही […]

राधा ने सिर पर धर मटकी बैठी छांव तले वट की जोह रही है श्याम को अखियां दिन बीता अब बीती रतियां श्याम बिना निष्प्राण है गैया देख रही सुध खोकर मैया क्यों निष्ठुर तू […]

फूलों ने पंखुड़ियों का हार बना कर पहना है प्रकृति की हरियाली का आज यही बस कहना है परियों के गहनों में सोने के बूटे पड़े हैं हम पत्तों के हारों में ओस मोती जड़ें […]

प्रिय की प्रियतमा बनकर आनंदमय जीवन का सूत्रधार बनो अशोविता हो एक सशक्त जीवन एक ऐसा ही तुम सार बनो संलग्न कर जीवन तुम अपना करो पथिक का पूरा सपना जीवन जिसका तुम संग बीता […]

आंखों में शर्म पलकों में हया लब पर मोहब्बत की दास्तां है आपके दिल से शुरू मेरा सफर आपकी बाहों में ही खत्म मेरा रास्ता है जी ना पाएंगे हम आपके सांसो के बिना आपकी […]

मम्मी की मैं रानी बिटिया पापा कहते सयानी बिटिया धमा चौकड़ी भागम – भाग कूद – कूद कर करती बात कहती मम्मी कहो कहानी जिसमें हो राजा और रानी हाथी घोड़ा शेर भी हो और […]

बेतार का तार भी क्या अजब खेल दिखाता है किसी हेलो पर चेहरा खिलखिलाता है तो किसी हेलो पर मुरझा जाता है हर एक कॉल की अलग कहानी है किसी में घुटन भरी छटपटाहट किसी […]

बहक ना जाएं कहीं कदम हमारे डरते हैं इसी बात से हम क्योंकि गुजरते हैं हर रोज हम भी मैखानें के करीब से। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

जब मां की कोख में मेरी जिंदगी पल रही थी मेरे बाप की चिता भी श्मशान में जल रही थी जब हमने इस दुनिया में अपनी आंखें खोली देखी खून की होली सुनी बंदूकों की […]

मेरे हर प्रश्न का जवाब है मां मेरे हर दर्द का इलाज है मां भीड़ में भी जो पहचान लेती है अपने बच्चों की हर एक आहट ऐसी अनपढ़ी, अनलिखी एक किताब है मां मेरे […]

विजय श्री का तिलक तभी तो लगेगा जब बन के चट्टान अग्नि पथ पर चलेगा कमजोर खुद को समझना है भूल कीचड़ में भी तो खिलता है फूल प्रश्न चिन्ह की मुद्रा से तुम ना […]

ईश्वर की भक्ति में छिपा है जीवन का आनंद शब्दों को ताकत देता है जैसे अलंकार और छंद उसके बिना इस जीवन में कुछ भी नहीं अस्तित्व हमारा मां बाप भी एक रूप है उनके […]

नहीं भुलाई जाती वो पिया मिलन की रात उस रोज पहली बार की हमने आंखों से बात सुहाग सेज के फूलों ने जाने कैसा जादू किया बेचैन निगाहों में है बस उन्हीं का इंतजार जो […]

सौ दफा मैं हारा बेशक जिद है फिर भी जीत की सरहद नहीं होती कोई परिंदों और प्रीत की। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

हमें मालूम होता अगर उनकी आदत है रूठ जाने की तो हम कभी परवाह ना करते इस जमाने की । तोड़कर दुनिया की सारी रस्में कसमें चले आते तेरे पहलू में दिल अपना रखने । […]

तन्हाई के आलम में घुट-घुटकर जब दर्द जवां होता है चाहत में खिले फूलों का पत्थर पर निशां होता है । टूट कर बिखरने से पहले यूं बाहों में समेट लेते हैं जैसे धरती को […]

लड़की है तो क्या हुआ हम भी लिख पढ़ ले अगर दुनिया के दरवाजे खुलेंगे मिलेगी हमको भी डगर विद्या में है ताकत कितनी बात समझ में आ गई दुनिया के हर क्षेत्र में नारी […]

सुंदर महिलाओं की सुरक्षा पर संसद में एक बिल पास हुआ पास होते ही बिल देश के कोने कोने में खास हुआ सरकार बोली सुंदर महिलाओं को जेड प्लस की सुरक्षा मिलनी चाहिए हर खूबसूरत […]

आपकी आंखों में खोना चाहता हूं आपकी जुल्फों में सोना चाहता हूं । अर्जी डाल रखी है हमने भी इजाजत की मंजूरी मिल गई, तो आपका होना चाहता हूं। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

प्रेम कहानी की शुरुआत जब हुई किस्तों में सही पर बात दिन रात हुई आंखों की नींद जाने कहां गुम हो गई अपनी भी खबर नहीं जब पास वह हुई। बिस्तर पर करवटें बदलते ही […]

इंसानियत कब इंसान की जिंदा होगी क्या तब जब हर आत्मा से निंदा होगी जागो देखो सोचो सुलग रहा है समाज कब तक बंद रखोगे अपनी आवाज बोलो जो चाहते हो, कहो जो सोचते हो […]

पगडंडियां जिंदगी के सफर में बहुत कुछ सिखा जाती हैं। कभी नफरत के साए में जीना कभी प्यार का पाठ पढ़ा जाती हैं। जिंदगी की पगडंडियों पर चलते हुए उम्र के कई पड़ाव पार कर […]

ये पता है कि दुश्वारियां बहुत हैं मोहब्बत की पथरीली राहों में । न जाने फिर भी क्यों बेचैन रहता है दिल सिमटने को किसी की बाहों में। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

मुसीबत के दौर में सतर्कता ही हर संकट का हल होगा । सतर्कता का लिबास पहन लो कल भविष्य तुम्हारा उज्जवल होगा । समृद्ध भारत के राह का उद्गम है, स्वच्छ, सतर्क और जोश भरे […]

हर घर से भाग रहा है बुराई का अंधेरा सोने वाले जाग गए हैं कल एक नया सवेरा मन की आंखों से निहारो हर बुराई में छिपी अच्छाई इसी सोच को सच करने फिर से […]

इन सुर्ख अधरों को मेरे गालों तक मत लाना चाहत और बढ़ जाएगी प्यार की । अपनी जुल्फों को अब और मत लहराना रात लंबी हो जाएगी इंतजार की । तड़पते रहेंगे उम्र भर मगर […]

दुखी वही है जिसका वर्तमान खोया है कल जो बीत गया कल जो आने वाला है दो कल के अदृश्य महलों में मन विचरता रहता है मन कितना निष्ठुर है खुद देख लो, दो कल […]

आप चाहते तो हालात बदल सकते थे, आप के आंसू मेरी आंखो से निकल सकते थे । मगर आप तो ठहर गए झील के पानी की तरह, दरिया बनते तो बहुत दूर निकल सकते थे।

जब से देखा तुमको ऐ सनम, हमसे ही दिल हमारा नहीं जाए संभाला । रात आंखों में ही कट जाती है, लगता है नींद ने आंखों से रिश्ता ही तोड़ डाला।

खुशियों की गुल्लक टूट गई जब अपनों से ही शूल मिला विश्वास करें भी तो कैसे जब कांटो में लिपटा फूल मिला। सगे-संबंधियों ने मुंह मोड़ा शायद कुछ हम मांग न ले कहीं मिले तो […]