कितने पर्दे बदले हैं,
इस जिंदगी ने।
कभी पुराने,
तो कभी नए।
कुछ फीके,
कुछ मटमैले।
और कुछ रेशम से नए।
कितने पर्दे बदले….
Comments
12 responses to “कितने पर्दे बदले….”
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आपकी सोच थोड़ा हट के है, साधारण से शब्दों से ही आप बहुत कुछ कह देती हैं
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आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
इस सुंदर समीक्षा के लिए। -
सुंदर
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हार्दिक धन्यवाद
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थोड़े से शब्दों में गहरी बात
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सादर धन्यवाद
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Very nice
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Thank you
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बहुत बढ़िया
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धन्यवाद सर
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Life is different…n we see new thing every day
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Thank you
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