कितने याद आते हैं- दोस्त

बचपन से ही न जाने कितने दोस्त बनाये
हंसी ख़ुशी उनके संग ज़िंदगी के पल ये विताये
जगह बदल जाने पर वे कितने याद आते हैं
मायुशियों के पल उनकी यादों से खाश होते हैं
नयी जगह में नए दोस्त ज़िंदगी में आते हैं
इस तरह पुराने दोस्तों को हम भूल जाते हैं
कुछ खाश जिनसे जुड़ जाता है आत्मिक रिश्ता
दिल के कोने में जो जगह पा लेते हैं गहरा
तनाव ज़िंदगी की जो अपने साथ से हर ले
मझदार डूबते को जो किनारे पर कर दे
बीते पलों के साथ वो और याद आते हैं
अच्छाई किसी की कहाँ कोई भी कभी भूल पाते हैं

Comments

4 responses to “कितने याद आते हैं- दोस्त”

  1. Geeta kumari

    बचपन से ही न जाने कितने दोस्त बनाये
    हंसी ख़ुशी उनके संग ज़िंदगी के पल ये विताये
    _________ बचपन के साथियों को याद करती हुई बहुत ही सुंदर रचना, उत्तम अभिव्यक्ति

  2. Ekta Gupta

    बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति

  3. मित्रता पर बहुत ही सुंदर बात कही है आपने

  4. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह

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