किसान आंदोलन

जिस बंदे ने तुम्हारी परोसी थाली है,
पर मजबूरन आज उसी की थाली खाली है।
और समझो धूप बरसात गर्मी -ठण्डी उन दताओ की
वरना राजनीति के चेहरे पर कालिख है।

कल जो बादल वर्षा करते रहते थे
कल तक जो तुमको थाली परसा करते थे
वो आज गरज-बरस कर राजनीति पर आये है
समझो तुम राजनेताओं तुम पर काले साये है।

Comments

5 responses to “किसान आंदोलन”

  1. Geeta kumari

    किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर रचना

  2. Satish Pandey

    बहुत सुंदर, अति उत्तम रचना

  3. vikash kumar

    Great

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