दो रोटी देने को तुमको,
रह जाता है भूखा वो;
दूध-दही देने को तुमको,
खा लेता है सुखा वो,
कभी बारिश कभी जाड़े में;
फसल हो जाती हैं चौपट,
माँगता है बस मेहनताना;
नहीं माँगता वो फोकट।
बेईमानी चोरी आदि से,
रहता कोसो दुर है;
चलता सन्मार्ग पर वह है,
करता मेहनत भरपूर है;
फिर भी दशा वही है उसकी,
स्तर नहीं सुधरता है
करता हैं क्यों आत्महत्या?
दुख से क्यों गुजरता है?
किसान
Comments
13 responses to “किसान”
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अत्यंत सुंदर कविता
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सुन्दर रचना
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वाह
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धन्यवाद
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Good
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धन्यवाद
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Nice
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धन्यवाद
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वाह जी वाह
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धन्यवाद
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अन्नदाता की व्यथा का सटीक चित्रण .. सुंदर रचना
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धन्यवाद चाचा जी
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Gr8
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