*किस्मत*

किस्मत से ही बनते हैं,
दिलों के रिश्ते
वरना चंद मुलाकातों से,
कहां रिश्ते बना करते हैं..

*****✍️गीता

Comments

5 responses to “*किस्मत*”

  1. जिन्दगी जीने का सलीका है वरना आदमी तो चंद मुलाकातों में मर जाता है
    यह पंक्तियां याद आ गई आपकी रचना पढ़कर

  2. अति सुंदर

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. आभार भाई जी🙏

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