कुछ कल्पनाएं…

कुछ कल्पनाएं
कविता का रूप लेती हैं
कुछ विस्मृत हो जाती हैं
कुछ सपनों में मिलती हैं तो
कुछ मद में बह जाती हैं
लेकिन कुछ कल्पनाएं
कल्पानाएं ही रह जाती हैं
सुबक-सुबक कर रोती हैं
सिसक-सिसक रह जाती हैं….

Comments

9 responses to “कुछ कल्पनाएं…”

  1. Amita Gupta

    बहुत सुंदर

  2. Ekta Gupta

    लेकिन कुछ कल्पनाएं
    कल्पनाएं ही रह जाती है
    बहुत सुंदर

  3. Praduman Amit

    वाह दिल को छू लिया।

    1. धन्यवाद 

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