कुछ नई उपलब्धि लाओ

आपकी लाठी
हमारी भैंस है
हाँकिये ना
आपकी तो ऐश है।
एक दूजे पर गिराकर कीच को
जीत में अब
किस तरह का पेंच है।
हो न हो मुद्दों का हल
रहने भी दो,
आपसी विद्वेष तो
बढ़ने न दो।
एक होकर बात को
आगे बढ़ाओ,
कुछ नई उपलब्धि लाओ
दम लगाओ।

Comments

7 responses to “कुछ नई उपलब्धि लाओ”

  1. बहुत ही सुंदर पंक्तियां

  2. vikash kumar

    पढ़ लिया कवितों की तरह, बहुत अच्छा लगा ।

  3. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह वाह क्या बात है!!!!

  4. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

  5. Satish Pandey

    वाह वाह बहुत खूब, बहुत ही शानदार

  6. वाजवाब शानदार

Leave a Reply

New Report

Close