कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर

कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर
क्या पता कभी कोई कविता बन जायें
कुछ दिनों को भी जोड रखा है
शायद कहीं ये भी कभी जिंदगी बन जायें

Comments

6 responses to “कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर”

  1. Panna Avatar
    Panna

    उम्दा..बेहतरीन

  2. Anjali Gupta Avatar
    Anjali Gupta

    so nice…mukul

  3. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    nice

  4. Satish Pandey

    कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर
    क्या पता कभी कोई कविता बन जायें
    Waah waah, very nice poem

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