कुण्डलिया. नर नारी में भेद न कर

नारी नर में भेद मत, अब कर हे इंसान
समता का अधिकार है, दो आँखो सा जान
दो आँखो सा जान, बनो सब रूप पुजारी
कन्या पत्नी बहिन, और माता है तुम्हारी
कह पाठक कविराय, सबल आंदोलन जारी
शिक्षित है संसार, संभाले अब की नारी

Comments

5 responses to “कुण्डलिया. नर नारी में भेद न कर”

  1. Ekta

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

  2. Pragya

    Very nice

  3. महिलाओं के सम्मान में लिखी गई बहुत ही उत्तम पंक्तियां आज का समाज बहुत ही आगे बढ़ चुका है ऐसे समाज में प्रगति तभी होगी जब नर नारी में भेद ना किया जाए 

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