कैसे कहें सुरक्षित हैं तू

कैसे कहें ” सुरक्षित हैं तू”
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हम भारत की आधी आबादी, कबतक सहे दुराचार
बढता ही जा रहा, थमता नहीं, हिंसक व्यवहार
आख़िर क्यूँ नहीं, कोई कर पा रहा इसका निराकार
सारी कोशिशें, सारे कानून, सावित हो रहे निराधार ।
दिन-प्रतिदिन बढती घटनाएं, छोङ रही सवाल
मानव क्या तू सच में है मानव कहलाने का हकदार
तेरी प्रवृतियाँ, पाश्विक नहीं, राक्षसों से बढ़कर है
कुछ तुम जैसों के कारण, हम सब ही हैं शर्मसार ।।
कबतक चलेगा यह घृणित मंशाओ का दुर्व्यवहार
कबतक आखिर बेटियां सहेगी अमानवीय अत्याचार
आख़िर क्यूँ होता यह मन दहलाने वाला बलात्कार
हे प्रभु! इन कुकर्मियो को तू ही सकता सुधार ।।
बेटियां देश के भविष्य की धरोहर, आधी आबादी है
पर विक्षिप्त सोंच, इनके मार्ग की सबसे बङी व्याधि है
आसमान में उङने की ललक लिए,मेहनत को अवादा हैं
पर कौन कहे, “निश्चिंत रह, सुरक्षित रहेगी तू”, वादा है
घिनौनी हरकतें कर रही, मानवता का तिरस्कार ।
बेटियाँ डरी-सहमी ना रहें, नि:संकोच कैसे विचरण करे
इनकी सुरक्षा करने को, हम सब मिलकर चिंतन करे
किसकी वज़ह से, बढ रहा, इनके प्रति यह अपराध
चिन्हित करना होगा, कारकों को, जिनसे बढा विषाद
हर घर को मिलकर, करना होगा इसका प्रतिकार ।।

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