इंसान इंसान से डरने लगा,
अदृश्य जीवों से मरने लगा।
जिन लोगों से महकती थी ज़िंदगी,
उनसे मिलने से मुकरने लगा।
वो दौर ना रहा, ये दौर भी जाएगा,
मिलकर “अकेले – अकेले” ये दुआ करने लगा।
कोरोना -काल
Comments
12 responses to “कोरोना -काल”
-
सुन्दर रचना
-
बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏
-
-

Nice
-
Thank you mam 🙏
-

वेलकम
-
-
-
वाह, सुन्दर रचना
-
बहुत बहुत शुक्रिया आपका 🙏
-
-
“वो दौर ना रहा ,ये दौर भी जाएगा
गया वक्त फिर लौट के आएगा” -

सही बात
-
धन्यवाद कमलाजी🙏
-
-

सच्ची बात
-
धन्यवाद पीयूष जी 🙏
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.