कोरोना का कहर, हर गली हर शहर

कोरोना का कहर
हर गली हर शहर

फिर से बढ़ रही है यह बीमारी
जनता मरती जाती बेचारी

आई है वैक्सीन नवेली
तुम आज ही लगवाओ सहेली

अपनी फिर से करो सुरक्षा
फिर से ठप्प हो गई शिक्षा

तुम कहीं भी घूमने जाओ
लेकिन मास्क लगाकर जाओ

मत लो तुम इसको हल्के में
मिलती जान नहीं सस्ते में

ना हो किसी को यह बीमारी
यही प्रार्थना है ईश ! हमारी

Comments

14 responses to “कोरोना का कहर, हर गली हर शहर”

  1. Geeta kumari

    कोरोना का कहर
    हर गली हर शहर
    _______ कोरोना पर कवि प्रज्ञा जी द्वारा लिखित सत्य रचना । कोरोना फिर से फैल रहा है, यही समझाती हुई अति उत्तम रचना

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  4. कोरोना को संज्ञान में लेकर लिखी गई
    सुंदर रचना

    1. धन्यवाद आपका

  5. कोरोना की वजह से बिगड़े हालातों पर सुंदर रचना

  6. ह्रदयस्पर्शी भाव

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