शरीर है कैद
मन भटक रहा है
कोरोना मानवता को
गटक रहा है
अस्पतालों में मानव
शिर पटक रहा है
गलियों मे पुलिस वाले
कहां भटक रहा है
काल ज्यूँ दरवाजे में
लटक रहा है
हाथ पाव हाथकड़ियां
मन चटक रहा है
राम जाने कब जाए
कोरोना खटक रहा है
कोरोना
Comments
3 responses to “कोरोना”
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बहुत खूब लिखा है आपने
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बहुत खूब
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महामारी का सचित्र वर्णन
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