क्या गिरा पाओगे?

हमें क्या गिरा पाओगे,
हमें क्या मिटा पाओगे,
जो जवानी में गिर गिर के चलना सिखा हो,
कभी आंसू तो कभी जहर पीना सिखा हो,

आज खुश है हमें छोड़ कर,
यारों हम भी खुश हैं उसे छोड़कर|😊🙂
✍✍✍✍✍✍✍✍✍✍
ऋषि कुमार “प्रभाकर”

Comments

5 responses to “क्या गिरा पाओगे?”

  1. Geeta kumari

    Nice lines

  2. Praduman Amit

    क्या ऋषि साहब आपकी यही कहानी।
    दिलों ग़म है और आँखों में पानी।।
    (रचना बहुत ही सुन्दर है)

Leave a Reply

New Report

Close