ना वास्ता
किसी से
रखते हैं लोग……
फिर जाने क्यूँ
जिन्दगीं से
खेलते हैं लोग…..
हालात बद से बदतर
होते जा रहे हैं
क्यूँ तैश में ही
अक्सर
रहते हैं लोग…..
किसी की ज़िंदगी
से यूँ
खेलना अच्छा
नहीं होता
फिर निहत्थों
पर वार क्यूँ
करते हैं लोग…..
क्यूँ ज़िन्दगी से खेलते हैं लोग…
Comments
7 responses to “क्यूँ ज़िन्दगी से खेलते हैं लोग…”
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Nice
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Thanks
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Nyc
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थैंक्स
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वाह बहुत सुंदर
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मार्मिक रचना
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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