क्यूँ ज़िन्दगी से खेलते हैं लोग…
ना वास्ता
किसी से
रखते हैं लोग……
फिर जाने क्यूँ
जिन्दगीं से
खेलते हैं लोग…..
हालात बद से बदतर
होते जा रहे हैं
क्यूँ तैश में ही
अक्सर
रहते हैं लोग…..
किसी की ज़िंदगी
से यूँ
खेलना अच्छा
नहीं होता
फिर निहत्थों
पर वार क्यूँ
करते हैं लोग…..
Nice
Thanks
Nyc
थैंक्स
वाह बहुत सुंदर
मार्मिक रचना
बहुत सुंदर पंक्तियां