पूछी सास नयी नवेली दुल्हन से।
बोल बहू क्या मांगी है भगवान से
बहू शरमाती हुई सास से कही
बेटा मांगी हूँ भगवान से
सास मुंह चमकाती हुई कही
क्यों नहीं मांगी बेटा भगवान से
बेटे से वंश बढ़ता है यह जान ले
कैसे बढ़ाएगी वंश बेटी से
दुल्हन =ज़माना बदल गया है माँ
लाख गुणा बेटी अच्छी है
नये ज़माने के बेटे से
बेटियाँ भी कुल के नाम रौशन करती है
तो भला क्यों उम्मीद रखें आज के बेटे से
बेटे बहू खाना खाए बड़े बड़े होटल में
घर में माँ बाप आशा
क्यों नहीं मांगी बेटा भगवान से
Comments
9 responses to “क्यों नहीं मांगी बेटा भगवान से”
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वाह बहुत खूब
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समीक्षा के लिए धन्यवाद।
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बहुत सुंदर प्रस्तुति
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आपने कविता को अवलोकन किया इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।
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https://youtube.com/channel/UCzllS9-Ku54ZfXRrnvVczSA
यह मेरे यूट्यूब चैनल की लिंक है कृपया सब्सक्राइब करें ।
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अति सुंदर भाव
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बहुत शानदार रचना, यथार्थ पर आधारित 🙏🙏
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बहुत खूब अति सुंदर पंक्तियां भावपूर्ण अभिव्यक्ति
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https://youtube.com/channel/UCzllS9-Ku54ZfXRrnvVczSA
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