तुम्हारा खत
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तुम्हारा खत पढ़ ही रही थी कि
भाभी आ गईं
खत तो छुपा लिया पर
खत में रखे तुम्हारे दिए गुलाब
गिर पड़े पलंग पर
इससे पहले भाभी देखें
उन्हें बातों में भरमाया
अपने दुपट्टे के अन्दर
फूलों को तुरंत छुपाया
“ओ भाभी ! आज तो आपका चेहरा
बहुत चमक रहा है
क्रीम का है कमाल या
एल.ई.डी. लाईट का इफेक्ट पड़ रहा है”
भाभी मुसकाने लगीं और
मन ही मन शरमाई
कुछ इस तरह उस दिन बुद्धी से मैंने
अपनी जान बचाई….
खत में रखे गुलाब…!!
Comments
6 responses to “खत में रखे गुलाब…!!”
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कवि प्रज्ञा जी द्वारा श्रृंगार से भरपूर लाजवाब अभिव्यक्ति।
बहुत खूब, रूमानियत अतिसुन्दर चित्रण। -

बहुत खूब
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वाह ,कवि प्रज्ञा जी ने बहुत सुन्दर चित्रण किया है,और भाभी को बुद्धू बनाने की कला तो क्या ख़ूब है वाह वाह ।आखिर किसी को बुद्धू बनाने के लिए बुद्धि तो होनी ही चाहिए ना ।
सुंदर शिल्प और बेहद शानदार प्रस्तुति । -

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बहुत उम्दा
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बहुत खूब
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