खफा हो गए बस

खफा हो गए बस
कारण न पूछो,
पूछोगे भी तो
बता न सकेंगे
कुछ ही दिनों में
फिर बोल लेंगे
ज्यादा खफा भी
रह न सकेंगे।

Comments

4 responses to “खफा हो गए बस”

  1. लाजवाब कविता है

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