खलिश जितनी भी है

खलिश जितनी भी है
सारी उड़ेलूं सोचता है मन,
मगर प्रसन्नता की राह तो
यह भी नहीं पक्की।
चलो छोड़ो भी जाने दो
न आये नींद आंखों में
मगर कुछ चैन पाने को
जरूरी है जरा झपकी।

Comments

16 responses to “खलिश जितनी भी है”

  1. गजब, सुन्दर

    1. धन्यवाद जी

    1. सादर धन्यवाद जी

  2. बहुत सुन्दर

    1. बहुत धन्यवाद जी

  3. सुन्दर पंक्तियां

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद, सादर नमस्कार

  4. काबिल- ए-तारीफ़

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      Thank you ji

  5. Geeta kumari

    काबिले तारीफ है सर..

    1. Satish Pandey

      बहुत सारा धन्यवाद जी

Leave a Reply

New Report

Close