खुशी तलाश की, तो मिल ही गई……

खुशी तलाश की, तो मिल ही गई

दर्द के नीचे दब गई थी कहीं।

छेड़ बैठे वो अपना ही किस्सा

बीच में बात मेरी, रह ही गई।

एक दीवार सी थी दोनों में

गिराने बैठे, तो फिर गिर भी गई।

मुद्दतों बाद वो घर आये मेरे

चलो अपनी दुआ भी, सुन ली गई।

सारी यादों की खूब कस कर के

गठरी बांधी थी,मगर खुल ही गई।

कश्ती तूफां से निकल ही आई

किसी तरह भी चली, चल ही गई।

………..सतीश कसेरा

Comments

4 responses to “खुशी तलाश की, तो मिल ही गई……”

  1. satish Kasera Avatar
    satish Kasera

    Thanks Panna

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

  3. Satish Pandey

    बहुत खूब

Leave a Reply

New Report

Close