गंदा है क्योंकि अब धंधा है

रहम, त्याग, सेवा का
बाज़ार अब मंदा है
इस शहर से बच निकलो
ये अब नरक का पुलिंदा है.
खून की कीमत आज
पानी से फीकी है,
मेरे शहर के फरिश्तों की
शैतान से माशूकी है.
छोड़ कर सेवा भाव
स्वार्थ में अंधा है,
ये अब गंदा है
क्योंकि अब धंधा है.

@दीपक कुमार श्रीवास्तव “नील पदम्”

Comments

6 responses to “गंदा है क्योंकि अब धंधा है”

  1. Neel Padam नील पदम्

    आपके इस लेख के बारे में क्या विचार हैं

  2. Neel Padam नील पदम्

    आईने से बस ये ही बात करता हूँ, – Read on Sahityapedia
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  3. Neel Padam नील पदम्
  4. Neel Padam नील पदम्

    इमारत बड़ी थी वो https://sahityapedia.com/?p=199516

    1. नील पदम्

      इमारत बड़ी थी वो

  5. Neel Padam नील पदम्

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