गायब हर मंजर मेरा

गायब हर मंजर मेरा
ढूढ़े परिंदा घर मेरा

जंगल में गुम फ़स्ल मेरी
नदी में गुम पत्थर मेरा

दुआ मेरी गुम सर सर में
भंवर में गुम महवर मेरा

नाफ़ में गुम सब ख्वाब मेरे
रेत में गुम बिस्तर मेरा

सब बेनूर क्यास मेरे
गुम सार दफ़्तर मेरा

कभी कभी सब कुछ गायब
नाम कि गुम अक्सर मेरा

मैं अपने अंदर की बहार
बानी क्या बाहर मेरा

Comments

2 responses to “गायब हर मंजर मेरा”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Satish Pandey

    बहुत खूब

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