गुरुर

सुविचार:-
कभी-कभी अपनी बात पर अटल रहने से
झुक जाना ही अच्छा होता है।
जैसे जब आँधी आती है
तो बड़े पेड़ गिर जाते हैं।
क्योंकि वह अपनी अकड़ में होते हैं
परंतु छोटी-छोटी झाड़ियां मगन होकर नाचती हैं
क्योंकि उन्हें गुरूर नहीं होता और वह झुकी रहती हैं।

Comments

4 responses to “गुरुर”

  1. बहुत सुंदर कविता

Leave a Reply

New Report

Close