उठ मेरी छोटी सी गुड़िया
सुबह हो गई उठ जा अब
बाहर सूरज चमक रहा है
सुबह हो गई उठ जा अब।
अपनी सुन्दर बाल लीलाओं
से महका गुड़िया रानी
अभी बोलना सीख न पाई
करने लग जा शैतानी।
दिन-दिन बढ़ते चले जा रहे
छठा माह आया लगने,
आज हमारी गुड़िया रानी
पलट रही खुद के कहने।
गुड़िया रानी
Comments
6 responses to “गुड़िया रानी”
-
अरे वाह, पिता के स्नेह को दर्शाती वात्सल्य से परिपूर्ण सुंदर रचना
-
सादर धन्यवाद
-
-
वाह
-
thanks
-
-

वाह-वाह
-
Thanks
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.