गैरों को मोहब्बत

कितनी शिद्दत से हम तुझे चाहते थे
तुझको अपना नसीब मानते थे..
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तुमने हमें छोंड़कर गैरों को मोहब्बत बक्शी
पर हम तो फकत तुझे अपना मानते थे..

Comments

3 responses to “गैरों को मोहब्बत”

  1. Praduman Amit

    Was kaya kahne

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