गोद

तेरी गोद में आकर मुझको जन्नत मिल जाती है,
मांगी हुई मेरी पूरी मुझको मन्नत मिल जाती है।।

राही अंजाना

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3 responses to “गोद”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Wah

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