नींद में सपने में हम
जाने कहाँ खो जाते हैं
जो कभी देखा नहीं हो
उस जगह हो आते हैं।
घमंड में गुरुर में हम
इस कदर गिर जाते हैं
गरीब भी इंसान है
इस बात को भूल जाते हैं।
घमंड में गुरुर में हम
Comments
18 responses to “घमंड में गुरुर में हम”
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👌👌👌
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Thanks ji
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बहुत खूब
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धन्यवाद जी
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Good
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Thanks ji
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सुन्दर काव्य
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धन्यवाद जी
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sundar
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सादर आभार
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वाह
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Thanks
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सही कह रहे हैं आप मैं सपने में पता नहीं कहां-कहां शॉपिंग कर आती हूं?
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वाह,
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अतीव सुन्दर
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Thanks
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Nice
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Thanks
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