घर है यह सिर्फ तुम्हारा

दिल में रहते हो तुम

घर है यह सिर्फ तुम्हारा

बसते थे यहां सदा तुम

बसेरा रहेगा स्दीवी तुम्हारा

जाना हे तो जांओ

पर ना इसे रुलाओ

क्या पाओगे इसे तड़पा कर

जो ना जी पाएगा

इक पल भी तुम्हे भुला कर

                           …… यूई

Comments

2 responses to “घर है यह सिर्फ तुम्हारा”

  1. Beautiful poetry 

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