7 Comments

  1. बहुत ही सोचनीय बात रखी है कवि प्रज्ञा जी ने कि बाहरी दुश्मन से ही निबट लो ।आपस में जातिवाद के नाम पर झगड़े करना मूर्खतापूर्ण ही है ।जिसने गलती की है उसे सज़ा मिले ,इसका जातिवाद से क्या लेना देना है ।बहुत शानदार प्रस्तुति ।

    1. लेना-देना कोई नहीं पर
      हमारे देश की राजनीति जातिवाद पर ही चलती है जिसकी वोट काटनी हो उसे पीड़ित बता दो……

  2. सही कहा आपने प्रज्ञा जी ना दलित ना पंडित मेरे हिसाब से सब दुःखी हैं किसी के साथ जातिगत भेदभाव आज के युग में होना चिंता का विषय है उच्चवर्ग को निम्म दृष्टि से देखना और निम्न वर्ग को प्रताड़ित करना दण्डनीय है इन सबका दोषी राजनीति और कुछ नेता हैं जो अपने निजी फायदे के लिए किसी जाति को गोद ले लेते हैं और दंगे भड़काते हैं आपकी कविता 100% सत्य है…

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