चल गए जीवन चरखे

बादिया सी जिंदगी में
आप बादल बन के बरसे,
खूब हरियाली सजा दी
जिंदगी के रोम हरषे।
ख्वाब में सोचा न था
आपको पाएंगे हम
आपके आने से सचमुच
चल गए जीवन चरखे।

शब्दार्थ –
बादिया – उजाड़ सी

Comments

17 responses to “चल गए जीवन चरखे”

  1. थोड़ा टाइपिंग मिस्टेक हुई है शीर्षक है
    चल गए जीवन के चरखे

    बादिया सी जिंदगी में
    आप बादल बन के बरसे,
    खूब हरियाली सजा दी
    जिंदगी के रोम हरषे।
    ख्वाब में सोचा न था
    आपको पाएंगे हम
    आपके आने से सचमुच
    चल गए जीवन के चरखे।

    शब्दार्थ –
    बादिया – उजाड़ सी

  2. बहुत ही जबरदस्त लिख रहे हैं, आजकल आप, वाह

  3. Suman Kumari

    बहुत ही सुन्दर

    1. सादर धन्यवाद जी

  4. बहुत ही सुन्दर अलफाजो में सजाया है आपने ।बहुतही सुन्दर

    1. इतनी सुंदर समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद सुमन जी

  5. Geeta kumari

    वाह सर, बहुत सुंदर काव्य रचना है। उपमा अलंकार का बहुत ही खूबसूरती से प्रयोग किया है सतीश जी।
    “बादिया सी ज़िन्दगी में आप बादल बन के बरसे”…वाह

    1. आपके द्वारा की गई उत्साहवर्धन समीक्षा से लेखनी को बल प्राप्त हुआ है। आपको बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी।

    1. सादर सादर धन्यवाद जी

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