हम इशारा जानते हैं

नाफ़हम मत समझना
हम इशारा जानते हैं,
आपकी नज़रों की जुम्बिश
की दिशा पहचानते हैं।
जर्ब मत दो इस तरह
सीने में अपने नैन से
सह न पाएंगे न जी पाएंगे
फिर हम चैन से।
शब्दार्थ —
जुम्बिश – हरकत
जर्ब – चोट

Comments

16 responses to “हम इशारा जानते हैं”

  1. बहुत खूब, wow

    1. सादर धन्यवाद

  2. बेहतरीन लिख रही है आपकी कलम पाण्डेय जी

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  4. बहुत ही सुन्दर

    1. सादर आभार जी

    1. सादर धन्यवाद जी

  5. Geeta kumari

    कवि मन के भावों की खूबसूरत रचना और प्रस्तुति।

    1. इस उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु सादर अभिवादन

  6. बहुत ही बढ़िया

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