अलबेली यह रात नवेली
कुछ हमसे कहने आई है,
मीठे-मीठे प्यारे-प्यारे
संग में सपने लेकर आई है।
मैं मूंदूँ और खोलूँ पलकें,
नींद नहीं आती फिर भी
जाने क्या खोया है मैंने !
और जाने क्या पाया है,
यह तो जाने वो ही जिसने
मेरा चैन चुराया है।
चांद ओढ़नी ओढ़ के देखो
मेरी छत पर आया है।।
चाँद ओढ़नी ओढ़ के देखो मेरी छत पर आया है
Comments
4 responses to “चाँद ओढ़नी ओढ़ के देखो मेरी छत पर आया है”
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बहुत सुंदर
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Tq
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अलबेली यह रात नवेली
कुछ हमसे कहने आई है,
मीठे-मीठे प्यारे-प्यारे
संग में सपने लेकर आई है।
मैं मूंदूँ और खोलूँ पलकें,
नींद नहीं आती फिर भी
जाने क्या खोया है मैंने !
और जाने क्या पाया है,बहुत ही उच्चकोटि की रचना
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आप वाकई प्रतिभावान हो
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