चांद भी फीका पड़ गया

चाँद भी फीका पड़ गया
तेरे छत पे आने के बाद।
सूरज भी नभ में ढक गया
जुल्फ घटा लहराने के बाद।।
कोयल भी सुनकर मौन है
तेरे सरगम गाने के बाद।
‘विनयचंद ‘ सब पा लिया
एक तुझको पाने के बाद।।

Comments

6 responses to “चांद भी फीका पड़ गया”

  1. वाह सर 👌✍✍

  2. Geeta kumari

    वाह भाई जी बहुत ख़ूब , बहुत ही सुन्दर चित्रण किया है ।

  3. बहुत खूब , सुन्दर अभिव्यक्ति शास्त्री जी

  4. वाह क्या बात है सर

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