नभमंडल को देख
हमने तो बस ये सीखे हैं।
एक चांद के बिना
लाखों सितारे फीके हैं।।
प्रेम नगर में आकर भी
प्रीत की रीति न सीखे हैं।
दु:ख दरिया को पार करे वो
जीवन के शुद्ध सलीके हैं।।
चांद सितारे
Comments
5 responses to “चांद सितारे”
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वाह विनय जी।
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Nyc
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हमनें तो बस ली सीखें
या सीखा है -

लाजबाब
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उम्दा कला पक्ष
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