चांद सितारे

नभमंडल को देख
हमने तो बस ये सीखे हैं।
एक चांद के बिना
लाखों सितारे फीके हैं।।
प्रेम नगर में आकर भी
प्रीत की रीति न सीखे हैं।
दु:ख दरिया को पार करे वो
जीवन के शुद्ध सलीके हैं।।

Comments

5 responses to “चांद सितारे”

  1. Praduman Amit

    वाह विनय जी।

  2. हमनें तो बस ली सीखें
    या सीखा है

  3. उम्दा कला पक्ष

Leave a Reply

New Report

Close