तुम्हारा इंतजार किया आम पकने की तरह
तुम रोज ख्वाब में आए शाम की चाय की तरह
तुम खो गए चाभी के जैसे मगर
मैनें ढूंढा है तुम्हें मूंगफली के दाने की तरह
चाभी के जैसे
Comments
13 responses to “चाभी के जैसे”
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Nice
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थैंक्स
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Nice
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थैंक्स
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Nyc
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थैंक्स
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Kuch bhi
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What???
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तो???
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वाह
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थैंक्स
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Nice
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धन्यवाद
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