चालबाजी

तेरी चालबाजी सब जानता हूँ मैं
न जाने फिर भी क्यों इतना तुझे मानता हूँ मैं।
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दिल बहुत बार दुखाया तूने पर
तुझे देख कर यही एहसास होता है
कि सदियों से तुझे जानता हूँ मैं।

Comments

11 responses to “चालबाजी”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही उम्दा

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  3. Geeta kumari

    यथार्थ चित्रण

    1. धन्यवाद आपका

  4. सुंदर पंक्तियां

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